राग-द्वेष को छोड़ सत्य और मैत्री की दिशा में गति करे आदमी: महातपस्वी महाश्रमण

-आचार्य महाश्रमण ने वर्ष 2022 में ‘डबल टू’ का दिया फार्मूला* 

-श्रीमुख से नूतन वर्ष के मंगलपाठ श्रवण को अरबन विलेज में उमड़े श्रद्धालु
-वर्चुअल रूप से आयोजित कार्यक्रम में अपने आराध्य के प्रेरणा प्राप्त कर निहाल हुई जनमेदिनी
जयपुर. राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर के अरबन विलेज परिसर शनिवार को जनता की विशाल उपस्थिति से जनाकीर्ण बना हुआ था। हो भी क्यों न जन-जन को सन्मार्ग दिखाने वाले, जन-जन में सद्भावना का संप्रसार करने वाले, लोगों को नैतिकता का मूल्य बताने वाले तथा अच्छा जीवन जीने के लिए नशामुक्त रहने की प्रेरणा देने वाले, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, आचार्यश्री महाश्रमणजी इसी स्थान से नूतन वर्ष 2022 के लिए मंगलपाठ प्रदान करने वाले थे। पूर्व निर्धारित समयानुसाार अनवरत गतिमान समय घड़ी के अनुसार जैसे ही 11.21 मिनट हुए वर्चुअल रूप से आचार्यश्री ने नूतन वर्ष 2022 के लिए मंगलपाठ उच्चरित किया तो इस विशाल परिसर में बने भव्य विराट हॉल में बैठी जनता ने आस्था, उल्लास व अहोभाव से अपने आराध्य के वचनामृत से प्रवाहित होने वाले मंगलपाठ का श्रवण कर वर्ष 2022 का आध्यात्मिक आगाज किया। देश-विदेश से उपस्थित विराट जनमेदिनी ने जहां आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित होकर मंगलपाठ व पावन प्रेरणा प्राप्त की तो वहीं वर्चुअल से रूप से देश-विदेश के कोने-कोने में बैठे श्रद्धालुओं ने भी पारस चैनल तथा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से अपने आराध्य के श्रीमुख से मंगलपाठ और प्रेरणा प्राप्त कर अपने नए वर्ष को अच्छा बनाने के लिए कृत संकल्प बने। 
शनिवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग सिंगार वैली से अरबन विलेज की ओर प्रस्थित हुए तभी श्रद्धालुओं का हुजूम जगह-जगह पर अपने आराध्य के अभिनन्दन कर रहा था। आचार्यश्री जैसे-जैसे आगे बढ़ते जा रहे थे, आस्था भावों से ओतप्रोत श्रद्धालुओं की उपस्थिति भी बढ़ती जा रही थी। लगभग आठ किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री जयपुर के बाहरी भाग कलवारा रोड में स्थित अरबन विलेज में पधारे तो इस परिसर से संबंधित लोगों को आचार्यश्री का भावपूर्ण स्वागत-अभिनंदन किया। आचार्यश्री ने निर्धारित समय पर नए वर्ष पर मंगलपाठ सुनाने के बाद श्रद्धालुओं को इस वर्ष के लिए कोई एक संकल्प स्वीकार करने प्रेरणा प्रदान कर उन संकल्पों का त्याग भी कराया। 
आचार्यश्री ने आगे समय की महत्ता की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि समय अनवरत गतिमान तत्त्व है। काल की लघुतम इकाई समय है। वर्ष 2021 अतीत के महासमुद्र में मिल गया और वर्ष 2022 वर्तमान हो गया। 2021 सबके लिए अलग-अलग रहा होगा। कितनों में खोया-पाया होगा। आदमी को असफल होने से भी प्रेरणा लेना चाहिए और उसे उत्साह के साथ और पुरुषार्थ करने का प्रयास करना चाहिए। प्रत्येक आदमी वर्ष 2022 में अपने जीवन में धर्म, अध्यात्म और ज्ञान के विकास करने का प्रयास करे। कुछ समय अपना ध्यान अपने प्रभु के साथ भी लगाए तो उसके जीवन का कल्याण संभव हो सकता है। आचार्यश्री ने ‘डबल टू’ का फार्मूला प्रदान करते हुए कहा कि इस वर्ष सभी राग-द्वेष को कम करने और सत्य और मैत्री की भावना को भावना को बढ़ाने का प्रयास करें तो जीवन में अच्छा बदलाव हो सकता है। पूर्वाचार्यों व तीर्थंकरों के जीवनवृत्त से भी प्रेरणा ली जा सकती है। प्रतिदिन अच्छा साहित्य पढ़ने का प्रयास होना चाहिए। आचार्यश्री ने साध्वीप्रमुखाजी के उत्तम स्वास्थ्य के प्रति मंगलकामना की। 
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के पश्चात मुख्यमुनि महावीरकुमारजी, मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी तथा साध्वीवर्याजी ने लोगों को संबोधित किया। अपने परिसर में पधारने के अवसर पर श्री दौलत डागा ने भी अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। जैन विश्व भारती द्वारा वार्षिक कलेण्डर पूज्यचरणों में लोकार्पित किया गया। आचार्यश्री की भले की आम जनता के लिए एलइडी स्क्रीन पर थे, किन्तु उनकी निकट सन्निधि श्रद्धालुओं में मानों एक नवीन ऊर्जा का संचार कर रही थी। जन-जन अपने आराध्य के श्रीमुख से नववर्ष का मंगलपाठ का श्रवण कर नयी ऊर्जा और शक्ति से भावित नजर आ रहा था। 

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